गुरुवार, 10 जुलाई 2008

हास्‍य/व्‍यंग्‍य आज मोहब्‍बत बन्‍द है- एम.पी. पुलिस : कल्‍ला के बाद अमरनाथ का भी कर डाला फर्जी एनकाउण्‍टर

हास्‍य/व्‍यंग्‍य

आज मोहब्‍बत बन्‍द है- एम.पी. पुलिस : कल्‍ला के बाद अमरनाथ का भी कर डाला फर्जी एनकाउण्‍टर

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

जैसे जैसे मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे वैसे राजनीतिक नूराकुश्‍ती बढ़ती जा रही है, मामला इस हद तक है कि यदि मुद्दा है तो है, नहीं है तो वो भी मुद्दा है । यदि कुछ नहीं है तो मुद्दे गये तेल लेने ससुरा पुतला तो फूं‍क ही डालो ।

कई साल पहले एक फिल्‍म आयी थी नाम था आपकी कसम, फिल्‍म की खास बात थी कि उसके दो गाने बड़े हिट और फिट हैं एक तो 'आज मोब्‍बत बन्‍द है ' दूसरा 'जय जय शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर' जरा देखिये इन दो गीतों ने भारत का भविष्‍य ही बता डाला था । 

अभी हाल ही में भाजपा ने बन्‍द करवा डाला, आजकल बन्‍द तो रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्‍सा बन गया है, मध्‍यप्रदेश विशेषकर चम्‍बलवासी हफ्ते में दो तीन दिन बन्‍द का आनंद लेते ही रहते हैं, कभी क्षत्रिय समाज का बन्‍द तो कभी मीणा समुदाय का बन्‍द, कभी ब्राह्मण बन्‍द कराते हैं तो कभी बनिये बन्‍द करा देते हैं, गूजरो ने तो थोक बन्‍द ही करा दिया, कभी कांग्रेस का बन्‍द तो कभी भाजपा का बन्‍द, कभी माकपा का तो कभी भाकपा का कभी सपा का तो कभी बसपा का । ससुरी जित्‍ती जाति हैं जित्‍ते धर्म हैं, जित्‍ते सम्‍प्रदाय हैं, जित्‍ते राजनीतिक दल हैं । सबके सब बन्‍द कराने पर तुल बैठे हैं । जो आवे सो बोले हैं बन्‍द । बन्‍द बन्‍द बन्‍द ।

बनिया सबसे डरता है, व्‍यापारी सबसे घबराता है, दूकानदार सबसे घिघियाता है, गली का कुत्‍ता भी चिल्‍ला दे कि आज बन्‍द तो पूरा समूचा मार्केट अपने आप बन्‍द हो लेता है । बन्‍द नहीं करा तो नुकसान, तोड़ फोड़, लूट लपाट और बेइज्‍जती । बन्‍द करा तो नुकसान । सो लोगों ने आदत डाल ली है कि हफ्ते में अब श्रम विभाग और दूकानदारी अधिनियम की एक छुट्टी के अलावा दो तीन छुट्टी और पड़नी हैं ।

बन्‍द कराना नेताओं का एक क्षत्र अधिकार है, नेता चाहे समाज का हो या राजनीति का सबसे पहले बन्‍द मांगता । बिना बन्‍द लगता ही नहीं कि कुछ हुआ । पता ही नहीं चलता कि कहीं किसी चीज का विरोध हो रहा है या आन्‍दोलन हो रहा है । बन्‍द जीवन का अविभाज्‍य अंग और भारतीय लोकतंत्र की अवधारणा है ।

बन्‍द पर टिके इस भारत के भविष्‍य के बारे में एक और मजेदार बात यह है कि लोग बाजार बन्‍द कर लेते हैं अपनी दूकानों के शटर डाल कर रखते हैं लेकिन उन्‍हें यह नहीं पता होता कि आज किस बात का बन्‍द है, बस पूछो तो कहते हैं कि आज बीजेपी का बन्‍द है आज कांग्रेस का या आज अलां का या फलां का ।

भाजपा ने काहे को बन्‍द कराया था मुरैना वाले बहुतेरो को नहीं पता (असल में बहुत बाद तक मुझे भी नहीं पता था) , मैंने कुछ दूकानदारों से पूछा कि ये कायका बन्‍द था । दूकानदार बोले पता नहीं बीजेपी का बन्‍द था, अमरनाथ अमरनाथ चिल्‍ला रहे थे, समझ नहीं आया कि अमरनाथ को किसने एनकाउण्‍टर कर दिया, कल्‍ला सिकरवार का तो पता है लेकिन ये अमरनाथ पता नहीं किसने ठोक दिया, शायद कांग्रेसीयों ने एनकाउण्‍टर करा होगा तभी बन्‍द करा रहे होंगें । मैंने अपने पुलिस मुखबिरों को फोन लगाया कि भईये ये अमरनाथ का एनकाउण्‍टर किसने कर दिया है बड़ा बन्‍द बन्‍द चल रहा है, मेरे पुलिस मुखबिर मित्र घबराये और बोले गुरू अगर अमरनाथ का भी फर्जी एनकाउण्‍टर हुआ है तो जरूर अमृत लाल मीणा ने ठोका होगा या फिर कैलारस या सबलगढ़ पुलिस ने ठोक दिया होगा । आप सीधे वहीं एस.डी.ओ.पी. को लगा लो । मैंने कई एस.डी.ओ.पी. और टी.आई. से खबर की पुष्टि और विवरण चाहा ससुरे सब के सब धुत्‍त और मस्‍त थे, हर कोई कहता था हमारे थाने के रोजनामचे में नहीं है, दादा जरूर अमृत मीणा ने ठोका होगा । हमारे यहॉं तो पन्‍द्रह दिन बाद रामसहाय गूजर गिरोह के चार आदमी ठोकने हैं, ये अमरनाथ फमरनाथ हमारे थाने के एरिया में कोई वारदात नहीं करता, और न उस पर कोई रिवार्ड है । ग्‍वालियर पुलिस से पूछ कर देख लो शायद टी- अलां फलां पर दर्ज हो, हो सकता है इण्‍टरनेशनल मुजरिम रहा हो और इण्‍टरपोल का रेड कार्नर हो । मैं फोन पर पैसे खर्च कर कर के  और माथा पटक पटक के परेशान था मगर खबर थी कि मिल ही नहीं रही थी ।    

खुद मैंने समझा कि कोई भाजपा नेता अमरनाथ होगा सो उसका भी पुलिस ने कल्‍ला सिकरवार की तरह फर्जी एनकाउण्‍टर कर डाला होगा तो बीजेपी भी क्षत्रिय महासभा की तरह बन्‍द करा रही होगी ।  लेकिन जब पलटकर कांग्रेसीयों ने लफड़ा किया और इन्‍दौर भोपाल में सरकार को रगड़ा तो मुझे टेंशन हुआ कि यार इसका मतलब अमरनाथ कोई ज्‍यादा बड़ा नेता था सो ज्‍यादा भभ्‍भर मच रहा है, मुझे इस बात पर भी शर्म आ रही थी कि इतना बड़ा नेता फर्जी एनकाउण्‍टर हो गया और मैं उसका नाम तक नहीं जानता । उफ मुझे तो डूब ही मरना चाहिये । मैं लालकृष्‍ण से शिवराज तक को जानता हूँ पर अमरनाथ को नहीं जानता, मैंने ठान लिया कि हम मीडिया में काम नहीं कर रहे झकमारी कर रहे हैं, बन्‍द आज से लिखना बन्‍द । सब बाजार बन्‍द कर रहे हैं, अमरनाथ बेचारा कोई बहुत बड़ा बढि़या आदमी होगा निबटा दिया इन पुलिस वालों ने बेचारे को, और हमें कानोंकान खबर भी नहीं हुयी, सो उनके बन्‍द के साथ अपना लिखना बन्‍द ।

बहुत बाद में मुझे पता चला कि मामला बाबा अमरनाथ का था, गुफा वाले अमरनाथ महादेव । अरे भईया वे तो अमर हैं, उन्‍हें कौन निबटा सकता है । पर बाबा को भी अब मीडिया में हाईलाइट होने का चस्‍का लग गया है, कभी लुप्‍त होकर, कभी गुप्‍त होकर तो कभी सुप्‍त होकर हर साल मीडिया की हेडलाइन में जगह पा ही लेते हैं अबकी बार बन्‍द करा कर राजनीति में भी तगड़ी एण्‍ट्री मारी है, हाहाकार और मारामार मचाते हुये, वाह बाबा वाह क्‍या धांसू एण्‍ट्री मारी है । राम जी ने भी मारी थी ऐसी ही धांसू एण्‍ट्री पर वे आउटडेटेड हो गये, बिना मन्दिर के ही क्‍लीन बोल्‍ड हो गये । दूध की मक्‍खी हो गये । बाबा तुम जरा देखना टंगड़ी बचा के खेलना, वरना चुनाव के बाद राम जी से बदतर हालत हो जायेगी । प्रभु आप तो अन्‍तर्यामी हैं, सब जानते हैं, फिर काहे को नेताओं के अण्‍टे में आके पार्टी ज्‍वाइन कर रहे हो, दूर ही रहो प्रभु । अभी सब पार्टी वाले आपके भक्‍त हैं आपके दर्शनों के जोखिम उठाते हैं फिर एक पार्टी को छोड़ दूसरा कोई तुम्‍हारा ना नाम लेवा होगा ना पानी देवा । सबके बने रहो इसी में बड़प्‍पन है । काहे को एक के नाम बदनाम होते हो । प्रभु आपका ठीया वहीं ठीक है, दिल्‍ली, भोपाल, इन्‍दौर से दूर ही रहो तो बेहतर हैं । 

रविवार, 6 जुलाई 2008

हास्‍य/व्‍यंग्‍य दिल पे जरा हाथ रख लो बाबू फिर गंगू बाई की चाल देखो... नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘आनन्‍द’

हास्‍य/व्‍यंग्‍य

दिल पे जरा हाथ रख लो बाबू फिर गंगू बाई की चाल देखो...

नरेन्‍द्र सिंह तोमर 'आनन्‍द' 

उल्‍टे रोजे गले पड़े 

               यूं तो कहावत ये भी है कि उल्‍टे बॉंस बरेली की ओर, लेकिन बात तो कहावत के फिट होने की है । किस्‍सा यूं हैं कि चम्‍बल में चार चोर निकले चोरी करने, रात का बखत था, पुलिस से भी सेटिंग बिठाई हुयी थी, तय था कि जो भी हाथ आयेगा उसमें से फिफ्टी फिफ्टी पुलिस बिटवीन थीव्‍ज डिस्‍ट्रीब्‍यूट होगा, पुलिस ने इस शर्त पर चोरों को चोरी का लायसेन्‍स दे दिया, और उनका कार्यक्षेत्र भी मुकम्‍मल तय कर दिया कि फलां गॉंव के फलॉं खेत से फलां खंती और फलां सड़क के दायरे में ही चोरी करोगे, उससे हट के दूसरे चोरों की सीमा शुरू होगी, दूसरों के एरिया में दखल नहीं दोगे, चोरों ने रजामन्‍दी के साथ लायसेन्‍स युक्‍त हो, अंधेरी रात में अपने शिकार की तलाश शुरू कर दी । चार चोरों में से एक ने जिस घर को ताक तूक कर नक्‍श पैमाना तय किया था, उस घर में उस दिन कोई नया बच्‍चा पैदा हो गया सो सारी रात घर में जागरण बना रहा । अब चोरों के सामने दिक्‍कत ये कि बड़ी मुश्किल से तो एक रात का लायसेन्‍स मिला, उस पर भी दॉंव खाली जा रहा था ।

मुश्किल में फंसे चारों चोर एक झुरमुट में बैठ कर बतियाने लगे, फुसफुसाये और विचार किया कि भैरों बाबा के मन्दिर पर चलते हैं, और वहॉं कुछ तलाशते हैं, कुछ हाथ लग ही जायेगा, और अगर किसी ने देख लिया तो कह देंगें, मन्दिर में भैरों बाबा के दर्शन करने आये हैं ।

चारों चोर भैरों बाबा के मन्दिर पहुँचे, गॉंव का मन्दिर था सो पट पटारी का झंझट नहीं था, एक चोर ने लपक कर बढि़या बड़े घण्‍टे आनन फानन में उतार लिये, दूसरे ने दान पेटी से चिल्‍लर बटोर ली, तीसरे ने मन्दिर के पुजारी के कमरे से काम की चीजें उठाई, पुजारी के कुर्ते की जेबें साफ कीं और चौथा बाहर पहरा देता रहा । काम तमाम कर माल लाद लूद कर चारों चोर खिसक लिये । अभी वे अपने गॉंव की ओर जा ही रहे थे, रास्‍ते में बीहड़ था, बीहड़ पार कर रहे थे कि तभी बगल की नरिया (बरसाती नाला) से आवाज आई, ठहर जाओ नहीं तो छप्‍पन गोली पार हो जायेंगीं । चोर थोड़ा सहमे, ठिठके, किन्‍तु फिर भी हिम्‍मत कर आगे बढ़े । तभी लगभग एक दर्जन लोगों ने उनके चारों ओर घेरा डाल दिया और चोरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया । वे चोरों को पकड़ कर अपने अडडे पर अपने चीफ के पास ले गये । हालात और माजरा देख कर चोर समझ गये कि वे डकैतों के चंगुल में फंस चुके हैं ।

डकैतों ने उन चोरों की पकड़ कर ली, यानि अपहरण कर लिया । साथ ही उनके द्वारा चुराया सारा मालमत्‍ता, और जेवर पैसा भी जप्‍त कर लिया । चारों चोरों से दस दस लाख रूपये की फिरौती मांग डाली सो अलग । अब तो चोर भारी संकट में फंस गये ।

चोरों के घर वाले चोरों के घर वापस न पहुंचने से चिन्तित हो गये, पहले समझा कि शायद चोरी करते पकड़ गये होंगें, सो अपनी रिश्‍तेदारी यानि थाने पहुँचे, और दरोगा से बोले कि हमारे घर वाले तो लायसेन्‍स्‍ड चोर थे लेकिन अभी तक घर वापस नहीं पहुंचे, क्‍या वे पकड़े गये हैं । दरोगा ने रोजनामचा चेक किया और बोला नहीं इस थानें में तो उनकी गिरफ्तारी दर्ज नहीं हैं । किसी और थाने के एरिया में तो एण्‍ट्री नहीं मार दी ।

तब तक एक चोर की घरवाली के चोरी के मोबाइल पर घण्‍टी आ गयी, घण्‍टी उसके पति यानि चोर के चोरी वाले मोबाइल से आयी थी, वह बोली 'अजी कहॉं हो तुम, हम बड़े परेशान हैं, ढूंढ़ ढकोर रहे हैं, तुम थाने भी नहीं पहुँचे, दरोगा जी भी टेंशन में हैं, वे समझ रहे हैं कि तुम माल पैसा लेकर रफूचक्‍कर हो गये । चोर उधर से बोला अरी फेमिली, हम बड़े संकट में फंस गये हैं, चोरी तो मन्दिर से हमने कर ली थी और चालीस पचास हजार का माल भी हाथ लग गया था, लेकिन घर लौटते वक्‍त हमारा किडनेप हो गया है, और अब हमें छोड़ने के बदले डकैत दस लाख रूपये मांग रहे हैं । कैसे भी इंतजाम करके हमें छुड़वा लो । और फिर मोबाइल डिस्‍कनेक्‍ट हो गया ।

चोर की बीवी ने दरोगा को बताया कि हमारे हसबैण्‍ड का किडनैप हो गया है और वे बता रहे हैं कि चालीस पचास हजार का माल उनके पास था, चोरी के माल सहित वे किडनैप कर लिये गये हैं । अब कुछ भी करो उन्‍हें छुड़वाओ ।

दरोगा बोला लेकिन उनके एरिया से चोरी की रिपोर्ट तो 90 हजार की आयी है, मन्दिर के पुजारी ने 90 हजार कीमती का माल पैसा चोरी होना बताया है, हमने अभी रिपोर्ट नहीं लिखी है, आवेदन लेकर जॉंच में डाल दिया है । पर ये अपहरण का क्‍या किस्‍सा नाटक है । फिर जो भी हुआ आप समझ गये होंगें, फिरौती देकर अपहृत छूटे यानि उल्‍टे रोजे गले पड़े ।

 

गुरुवार, 22 मई 2008

सोच समझ कर थूकिये, थूक बड़ा अनमोल, लघुशंका भी कीजिये सोच समझ और तोल

सोच समझ कर थूकिये, थूक बड़ा अनमोल, लघुशंका भी कीजिये सोच समझ और तोल

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

अभी आजकल ताजा खबर चल रही है , ग्‍वालियर नगर निगम ने थुक्‍का फजीहत बन्‍द कराने के लिये, थूकना प्रतिबन्धित कराने की जुगाड़ खोज ली है खबर कुछ इस प्रकार है -

थूकने के सौ रूपये, लघुशंका के ढाई सौ, दीर्घ शंका पॉच सौ में हो सकेगी 

 ग्वालियर दिनांक 21 मई 2008 - नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने के लिये अब नगर निगम ग्वालियर द्वारा विभिन्न प्रकार के अर्थदण्ड निर्धारित कर दिये गये हैं । अब नागरिक सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 100/-, पेशाब करने पर 250/-, शौच करने पर 500/-, पशु को आवारा छोड़ने पर 1000/- तथा सार्वजनिक स्थानों पर रासायनिक अपशिष्ट डालने पर 1000/- रू., सार्वजनिक स्थानों पर हानिकारक द्रव्य बहाने 1000/- रू. तथा गंदगी फैलाने पर 2500/- से दण्0श्निडत हों सकेंगे।

निगमायुक्त डॉ. पवन शर्मा द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि म0प्र0 शासन, नगरीय प्रशासन के आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि नगर निगम क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन के उल्लंघन हेतु दाण्डिक प्रावधानों का पालन किया जावे, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्ति दुकानदारों, संस्थानों, होटलों, फैक्ट्रीयों, रेस्टोरेंटों पर गंदगी फैलाई जाती है तो उनके खिलाफ म0प्र0 शासन नगरीय प्रशासन नियमों में आरोपित अर्थदण्ड से दण्डित किया जावेगा।

निगमायुक्त द्वारा जारी निर्देश में अपर आयुक्त समस्त उपायुक्त, सहायक आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी, सहायक प्रभारी स्वास्थ्य एवं कचरा प्रबंधन अधिकारी निगम के चिकित्सा अधिकारी क्षेत्राधिकारियों ए.एस.आई. तथा दरोगा स्तर के अधिकारियों को क्षेत्रांतर्गत नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं, घरों, दुकानों, फैक्ट्रीयों के मालिकों जिनके द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी प्रदूषण उत्तेजक ठोस तथा द्रव्य पदार्थ कचरे के रूप में डाले जायेंगे। अधिसूचित क्षेत्रों को छोड़कर उनके विरूद्व उपरोक्तानुसार अर्थदण्ड लगाने के लिये अधिकृत किये गये हैं । उक्त प्राधिकृत अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रांतर्गत नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्व अर्थदण्ड की कार्यवाही करेंगे तथा जुर्माना राशि की रसीद देंगे। साथ ही जुर्माने से वसूल की राशि 24 घण्टे के अंदर निगम कोष में जमा करावेंगे।

 

गोया कुछ दिनों से बड़ी थुक्‍का फजीहत चल रही थी, कोई भी कहीं भी आकर थूक जाता था, थूकना ग्‍वालियर के लिये टेंशन हो गया । कोई इस पर थूक रिया है, कोई उस पर थूक रिया है, कोई नेता जी पे थूक रिया है कोई पुलिस पे तो कोई सरकार पे । कोई कोई पठ्ठा तो नगर निगम पे ही डायरेक्‍ट थूक देता था । हुम्‍फ थूक थूक बेहाल कर दिया ग्‍वालियर को ।

ग्‍वालियर वालों की एक और पुरानी आदत है, बड़ी जल्‍दी लपक के ऊंगली छोड़ पहुँचा थाम लेते हैं, सो यह लाजमी था कि बात थूक से भी आगे बढ़ती, बढ़ते देर न लगती । प्राब्‍लम शुरू में ही फिक्‍स हो जाये तो बेहतर रहती है, कहावत है कि रोग बढ़ने से पहले इलाज बेहतर है, थुक्‍का थुक्‍की से आगे मामला जाये इससे पहले ही, सरकार बैठ गये चिन्‍तन, मन्‍थन और मनन में । नगर पालिका अधिनियम छान मारा, सारी धारायें खंगाल डालीं । और आखिर मिल ही गया अलादीन का चिरागी जिन्‍न, कि सार्वजनिक प्‍लेस पर गंदगी करना अपराध ए अधिनियम है । आई.पी.सी. में तो लघुशंका पे से ही मामला बनता है लेकिन नगरपालिका अधिनियम ने थूकने पर से ही मामला बनाने की राह सुझा दी । अफसरों की जान में जान आयी । गोया पॉंत में जात मिल गयी ।

थूका, मूता, या .....वगैरह वगैरह तो बेटा निबट जाओगे । अब अगर ग्‍वालियर में कहीं थूकना है तो बेटा जेब में सौ का एक नोट कड़कड़ाता हुआ डाल कर चलना । और मूतना है तो ढाई सौ के पत्‍ते कड़कड़ाते हुये जेब में होने चाहिये । वरना निहाल हो जाओगे ।

अगर आप सौ के कई नोट जेब में रख कर चलेंगे तो ग्‍वालियर में कई बार थूक सकेगे, आपकी जेब के नोटों की संख्‍या के अनुसार जम कर मूत भी सकेगे । यानि जेब में नोट हैं तो ग्‍वालियर में जम कर थूको और मूतो, वरना पतली गली से निकल लो ।

देश भर के थुकेरों और मुतेरों को ग्‍वालियर बुला रहा है, पैसा लाओ, थूको और मूतो ।

मेरे वकील मित्रों को यह खबर बड़ी बढि़या लगी, उनकी खुपडि़या घूमी बोले गुरू ये मामला जनहित में आ सकता है, मैं बोला कैसे, वे बोले कि अरे भईया ग्‍वालियर जाकर खांसी वाले, टी.बी. वाले इलाज कराते हैं, और थूकना उनके संग चलता है अब क्‍या उनको थूकदान संग ले जाना पड़ेगा या सार्वजनिक प्‍लेस पे अपने निजी थूकदान या पीकदान या मूतदान में कोई विसर्जन नहीं कर सकेगा, आदेश स्‍पष्‍ट नहीं है ।

मैंने कहा नहीं यार ये तो थुक्‍का थुक्‍की कर थुक्‍का फजीहत वालों के लिये आदेश है । जनरल पब्लिक के लिये नहीं है । लेकिन अब भई वकील तो वकील हैं, हर जगह कील ठोकना उनका पेशा है, लगी तो कील न लगी तो अपील, वकील साहब बोले कि गुरू, बात कुछ जँची नहीं, इस आदेश के मुतल्लिक तो सार्वजनिक प्‍लेस पर सब कुछ मना है, यानि सार्वजनिक मूत्रालय और सार्वजनिक शौचालय भी इसमें वर्जित प्‍लेस हो जाते हैं ।

मेरी खुपडि़या वकील साहब चेंट चेंट कर चाट गये, मुझे तो कोई समाधान नहीं सूझा, फिलहाल मुझे कोई टेंशन भी नहीं है, हमारे मुरैना में तो सब फ्री है, चाहे जहॉं चाहे जिस पर चाहे जितना थूको, नो टेंशन, चाहे जिधर बैठकर, खड़े होकर, चाहे जिस दिशा में निवृत्‍त हो लो नो टेंशन, थुक्‍कमथुक्‍क, दिशा मैदान, लघुशंका यहॉं सारे आइटम फ्री हैं, चाहे जिसके दरवाजे पर कर आओ । डायरेक्‍ट नगरपालिका पे भी कर दो, नो टेंशन । ग्‍वालियर वाले ग्‍वालियर की जाने, नो टेंशन ।               

 

मंगलवार, 15 अप्रैल 2008

बाकी कुछ बचा सो मँहगाई मार गई ....आधी हकीकत आधा फसाना तेल देखो तेल की धार देखो

बाकी कुछ बचा सो मँहगाई मार गई ....आधी हकीकत आधा फसाना

कड़वा सच

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

 

आज चारों ओर मंहगाई का हल्‍ला है, जिधर देखो उधर चिल्‍लपों मची है, सारे के सारे नेता गला फाड़ के नर्रा रहे हैं । नर्रा क्‍या डकरा रहे हैं, रोटी कपड़ा और मकान का गाना बजा रहे हैं बजा क्‍या जनता को सुना रहे हैं , देश का समूचा मीडिया महज भोंपू बन कर रह गया है, अरे भोंपू क्‍या सार्वजनिक मूत्रालय बन कर रह गया है, जो आता है टायलट कर जाता है, नेता छोटा हो चाहे बड़ा मीडिया भोंपू की तुरही में हल्‍की सी फूंक मार जाते हैं और मीडिया भनभना कर उनकी फूंक को सुर में बदल कर एम्‍पलीफाई कर देता है ।

धन्‍य है जगत नरायन, तुमसे तो नारद अच्‍छे थे, कम से कम खुद की कारीगरी तो दिखाते थे, अच्‍छे भले चलते फिरते मीडिया थे । अरे भईया माना विज्ञापन मजबूरी है लेकिन चारण भाट बन जाना तो मजबूरी नहीं हो सकती । जो सरकारों की सेवाओं में यस राजाओं (नेताओं) की चाटुकारिता में सवैये और कवित्‍त बॉंचने लगे ।

मंहगाई मंहगाई मंहगाई, कहॉं से आयी मंहगायी, बजट में तो कुछ नहीं बढ़ाया गया फिर ये मंहगाई कहॉं से आयी । जब बजट आने से तीन दिन पहले सारे बाजार का माल अण्‍डरग्राउण्‍ड हो गया था और सिगरेट माचिस जैसी चीजें ब्‍लैक में बिक रहीं थीं, तब कोई क्‍यों नहीं नर्राया मंहगाई मंहगाई ।

पिछले दस साल में जब सोने के दाम पॉंच हजार से पन्‍द्रह हजार तक आये तब कोई क्‍यों नहीं नर्राया मंहगाई मंहगाई मंहगाई । जब सरकारी अफसरों और नेताओं के वेतन भत्‍ते पिछले दस साल में दस दफे बढ़े तब कोई क्‍यों नहीं नर्राया मंहगाई मंहगाई मंहगाई ।

चम्‍बल घाटी का मुरैना जिला सरसों का सबसे बड़ा उत्‍पादक है, यहॉं सरसों के अखण्‍ड भण्‍डार हैं, सरसों से सरसब्‍ज इस जिले में जब सरसों का तेल 88 रूपये किलो बिका तो कोई क्‍यों नहीं नर्राया मंहगाई मंहगाई मंहगाई । सरसों के भण्‍डार तो आज भी इस जिले में किलो टनों में हैं, मगर किसान के यहॉं नहीं सेठजी के यहॉं, बावजूद इसके किसान के हाथ तो मुरैना जिला में अभी भी इतनी सरसों हैं कि कम से कम ग्‍वालियर चम्‍बल में तेल के दाम चौथाई पर ले आये । लेकिन सेठजी के गोदाम में तो सरसों के इतने अकूत भण्‍डार है ( किसे नहीं पता) कि सारे देश में तेल के दाम चौथाई करा दें ।

मुरैना से प्रतिदिन बाहर जाने वाले हजारों टन तेल को रूकवा क्‍यों नहीं देते नेता जी, अभी हाल पता चल जायेगा कि मंहगाई के पीछे असल राज क्‍या है । फिर नर्राना मंहगाई मंहगाई मंहगाई । पर कैसे रूकवाओगे नेताजी सेठ जी तो आपकी रिजर्व बैंक भी हैं और वोट बैंक भी । वही सेठजी तेल और सरसों दोनों को ब्‍लॉक कर के बैठे हैं महाराज ।

ये वही सेठ जी हैं गरीब के दुश्‍मन सेठों के मसीहा और नेताओं के रिजर्व बैंक, जिन्‍होंने चन्‍द साल पहले केन्‍द्र सरकार से खुले तेल की बिक्री पर रोक लगवा के अपने पाउचों में तेल बेचने की मंजूरी दिला ली थी, तब हम नर्राये थे खूब भभ्‍भर मचाया था और चम्‍बल के किसानों को उनके द्वारा ही पैदा की गयी सरसों का तेल खुद पिरवा कर खाने से रोकने और अपनी सरसों का तेल सेठ जी से पिरवा कर पाउच में तीन गुने जादा दामों पर खरीद कर खाने से हमने जैसे तैसे बचाया था । इसके चन्‍द सालों बाद सेठ जी ने फिर ड्राप्‍सी शिवपुरी जिले में फैलवायी थी और मुरैना के कलेक्‍टर से ऊपर ही ऊपर आर्डर निकलवा कर मुरैना जिला में खुले तेल की बिक्री बन्‍द करवाई थी तथा फिर पाउचों में तेल खपाया था, उस समय खुले बाजार में खुले तेल के दाम थे 28 रूपये किलो और सेठजी के पाउच का तेल था 70 रूपये  प्रति किलो, लोगों ने उस भ्रष्‍ट कलेक्‍टर के रहते मजबूरी में सेठ जी का तेल झेला, हमने फिर ऊधम भभ्‍भर मचाया और कलेक्‍टर बदलते ही सेठजी का आर्डर निरस्‍त कराया ।

सेठ जी के किसी जमाने में अर्जुन सिंह ( वर्तमान केन्‍द्रीय मंत्री) जीजा हुआ करते थे, उसके बाद दिग्विजय सिंह भी कुछ समय सेठ जी के जीजा बने रहे, आजकल रूस्‍तम सिंह (म.प्र. के पंचायत मंत्री ) उनके जीजा हैं या क्‍या हैं पता नहीं, मगर दोनों की जोड़ी धरम वीर जैसी जोड़ी है, इत्‍ता पता है ।

सात अजूबे इस दुनिया में आठवीं इनकी जोड़ी, तोड़े से भई टूटे ना ये धरमवीर की जोड़ी । मुझे ये गाना बहुत पसन्‍द है । और इस जोड़ी पर फिट भी है ।

सेठजी के गोदाम तेल और सरसों से लबालब हैं नेता जी, सेठजी किलो टनों में तेल रोजाना बाहर भी भेज रहे हैं, उससे ज्‍यादा अण्‍डरग्राउण्‍ड दबाये भी बैठे हैं । दम है तो रोको मंहगाई, सेठ जी का तेल म.प्र. में भी बंटवा दोगे तो प्‍यारे म.प्र. की मंहगाई गारण्‍टी से खत्‍म हो जायेगी । गारण्‍टी क्‍या चैलेन्‍ज से खत्‍म हो जायेगी । लो एक पता तो बता दिया करो कार्यवाही, इसके बाद फिर और कई पते बतायेंगे और भी माल बतायेंगे, हम घटवायेंगे मंहगाई करो कार्रवाई , फिर उसके बाद नर्राना मंहगाई मंहगाई मंहमाई ।  

सोमवार, 7 अप्रैल 2008

न नहाना ना धोना, मगन रहना, पूजो माता, बिजली पानी बिना, विद्युत राक्षस का माता के भक्‍तों पर हमला, लाखों चपेट में, राज्‍य संकट में

न नहाना ना धोना, मगन रहना, पूजो माता, बिजली पानी बिना, हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को राज्‍य सरकार का तोहफा

विद्युत राक्षस का माता के भक्‍तों पर हमला, लाखों चपेट में, राज्‍य संकट में या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

मुरैना 7 अप्रेल 08, राज्‍य सरकार ने चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा हिन्‍दू नवसंवत्‍सर पर हिन्‍दूओं को तोहफा देते हुये सोमवार को सबेरे बिजली काट कर न केवल हिन्‍दूओं को ही उपकृत कर दिया बल्कि माता के भक्‍तों को बिना नहाये धोये और बिना जल भरे खाली कलशों के साथ माता की पूजा के लिये भी विवश कर दिया ।

उल्‍लेखनीय है कि कल रविवार से नवरात्र महोत्‍सव प्रारंभ हो चुका है और माता की प्रतिष्‍ठा स्‍थापना के साथ ही जवारे बो कर तथा जल घट स्‍थापना आदि करके, नियमित रूप से स्‍नान आदि से निवृत्‍त हो माला को जल स्‍नान, जल अर्पण एवं तर्पण आदि कर्म करते हैं । इसके साथ ही नौ रात्रि तक माता का निरन्‍तर जप अनुष्‍ठान, भजन पूजन आदि नियमित रूप से किया जाता है ।

अधिकांश लोगों द्वारा रविवार को ही माता की प्रतिष्‍ठा कर अर्चना अनुष्‍ठान प्रारंभ कर दिया गया था, कुछ लोग कतिपय समाचारपत्रीय भ्रम स्‍थापना के कारण इसका प्रारंभ आज सोमवार से कर रहे थे ।

खैर जो भी हो आज की बिजली दुर्गत सुबह सात बज कार 17 मिनिट से शुरू हुयी यानि सबेरे कटी बिजली ने अभी समाचार लिखे जाने के वक्‍त तक कुछ ऐसा कोहराम मचाया कि अब इसे ''विद्युत राक्षस'' की संज्ञा दी जाये तो कुछ भी अनुचित नहीं होगा ।

कुल मिला कर समाचार लिखे जाने और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त तक बिजली बन्‍द थी, हॉं हर एक या दो घण्‍टे बाद जरूर महज 3 या 4 मिनिट के लिये अपनी झलक दिखलाती रही । यानि यूजलेस बिजली, बट बिजली वाज अवेलेबल, अब 3 या 4 मिनिट को आने वाली बिजली का कब कैसा कितना इस्‍तेमाल कर सकते हो कर लो बेटा, पूज लो माता, दे दिया राज्‍य सरकार ने नवसंवत्‍सर को तोहफा । यानि पहले ही दिन मस्‍त व शुभ आरम्‍भ । जय माता की ।।

''दुर्गा दुर्गत दूर कर '' यह पुराना भजन है, बत्‍तीस नाम माला में भी यह उल्‍लेखित है । केवल सिद्ध कुंजिका में संशोधन कर लिया जायेगा तो बात कुछ यूं बनेगी कि ''देवी के लिये ''विद्युत राक्षस'' का संहार परम अनिवार्य हो जायेगा ।

केन्‍द्र सरकार ने हिन्‍दू नव संवत्‍सर पर, सिंधिया जी को अंचल में मंत्री के रूप में जहॉं एक तोहफा दिया वहीं राज्‍य सरकार का तोहफा भी अंचल में खूब सराहा गया ।

जय भवानी, या देवी सर्वभूतेषु विद्युत रूपेण संस्थिता, नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम :

रविवार, 30 मार्च 2008

हूँ.....लो हो गया एनकाउण्‍टर कर दिया शॉट डेड साले को

हास्‍य/व्‍यंग्‍य

हूँ.....लो हो गया एनकाउण्‍टर कर दिया शॉट डेड साले को

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

शहर ए आजम इन दिनों तफरी पर हैं, उनका स्‍टाफ आजाद इन दिनों पूरी आजादी और लोकतंत्र का आनन्‍द ले रहा है । साहब के कार्यालय में इन दिनों मार्च क्‍लोजिंग चल रहा है, साहब को हुकुम मिला कि बजट पूरा निबटाना है, एक पाई भी सरैण्‍डर नहीं होनी चाहिये । निपटाओं कैसे भी कहीं भी ।

साहब और साहब के सैनिक हर साल कुछ पैसा सरैण्‍डर कर लौटाने के आदी थे और बजट सरैण्‍डर करना तथा पैसा वापस सरकार को भेजना उनकी सालानाचर्या का अहम भाग थी । वे इसे सरकारी पैसे की बचत मानते आये थे । पैसा लौटा कर छाती ठोक के सीना तान के अपनी तारीफ में खुद ही कशीदे बॉंच लिया करते थे ।

अबकी बार ससुरी मुसीबत हो गयी, सब उल्‍टा हो गया गुल गपाड़ा हो गया । ऊपर से आदेश हैं सरैण्‍डर नहीं एनकाउण्‍टर चाहिये, वापसी नहीं उपयोगिता प्रमाण चाहिये ।

रटी रटाई लाइनों पर ट्रेडीशनलीया स्‍टाइल में काम करने वाले सरकारी कार्यालय नये किस्‍म के आदेश से चक्‍कर में पड़ गये । सरकारी बचत की जगह अब सरकारी खपत में सरकारी खुपडि़या दौड़ा दौड़ा कर बेहाल हो गये मगर ससुरा बजट था कि जित्‍ता खर्च करो बढ़ता ही जाता था ।

ऑफिस के बाबूओं के चकरघिन्‍नी हो जाने के बाद भी जब बजट का निकाल ( यह सरकारी शब्‍द है) जब पल्‍ले नहीं पड़ा तो साहब से मार्गदर्शन चाहा गया, साहब ने मोबाइल से मार्गदर्शन दिया, कि पहले लिस्‍ट बना लो कि अपने ऑफिस में क्‍या क्‍या होता है, और उसमें क्‍या क्‍या सामान लगता है या क्‍या क्‍या खर्च होता है फिर उसके सामने खर्चा डालना शुरू करो ।

बाबूओं ने साहब के निर्देशानुसार लिस्‍ट बनाना शुरू की, लिस्‍ट बनी तो ठाकुर साहब द्वारा हवन के लिये लिखाई जाने वाली सूची की तरह बन गयी । अब इस लिस्‍ट में खर्चा डालने का काम शुरू हुआ, सारे खर्चे डालने के बाद भी बजट फिर भी एनकाउण्‍टर नहीं हुआ, फिर सरैण्‍डर हुआ जा रहा था, बाबूओं ने फिर ऊपर से मार्ग दर्शन चाहा, ऊपर से मोबाइल पर आकाशवाणी स्‍टायल में साहब फिर भगवान कृष्‍ण की तरह मुस्‍कराते हुये उवाचे कि ऐसा करो कि मनमानी रकम भर दो, बाबू अर्जुन के मानिन्‍द घिघियाये कि साहब पहले से हम 400 के 3400 और 700 के 70000 लिख लिख कर रखे हैं पर फिर भी साला सरैण्‍डर कर रहा है अब कैसे एनकाउण्‍टर करें ।

साहब ने गीता के सोलहवें अध्‍याय के कृष्‍ण के मानिन्‍द कहा कि आसुरी सम्‍पदा से काम नहीं चल पा रहा तो दैवीय सम्‍पदा भी शामिल कर लो, फिर भी बात न बने तो सत्रहवें अध्‍याय वाले त्रय गुण विभाग कर लो, बाबूओं ने फिर अफसर से मार्गदर्शन चाहा और कहा प्रभो आपकी बातें कुछ समझ नहीं आ पा रहीं, अगर हिन्‍दी में बतायें तो शायद समझ में आ जाये । या फिर मुरैना के अंग्रेजी स्‍कूलों वाली इंग्लिश स्‍टायल में बता दें तो कुछ पल्‍ले पड़ जाये ।

अफसर मोबाइल वाली आकाशवाणी पर फिर कृष्‍ण स्‍टाइल को छोड़ मुरैना के अंग्रेजी स्‍कूलों के टीचर स्‍टाइल में अपनी व्‍याख्‍या सुनाने लगे और बोले, ऐसो करियो जित जित में कोमा लगे होयं तहॉ तहॉं ऐसी ऐसी मद डार दियो तिनके प्रूफ न होतई, और दो चार दिना बाद डिलीट हे जातें । जैसें दीवाल की लिखाई हर महीना के खच्‍च में एण्‍ट्री कर देओ, दीवाल की लिखाई हप्‍ता आठ दिना में मिटरत रही, हम लिखवावत रहे, ऐसेंई लिखीयो हमने भोंपू बजवाये प्रचार के काजें, रिक्‍शान में लाउडस्‍पीकर धरकें बजवाये, गामन में ऐलान करवाये, नास्‍ता फास्‍ता डीजल फीजल सिग डार डूर के देखो अब तिहाई बैलेन्‍स सीट का कहि रही है, फिरऊ बचें तो पेड़ पौधा लगाइबो दिखाय दीयो, कोऊ स्‍पष्‍टीकरण आवे तो कहि दीयो हमने तो लगाये हते, अब गैया भैंसे चर गयीं तो का करें । और बिनकी जाली को खच्‍च डारों तो लिख दीयो के पानी नहीं परो सो सूख साख गये, अबऊ कछु खच्‍च बच परे तो फैक्‍स में और फोनन में दिखाय दीओ, जे सिग कर करू के फिर हमें फोन लगाय लीयो, दूसरे नम्‍बर पे लगईयो, जा नम्‍बर को हम बन्‍द राखेंगे, पबलिक डिस्‍टरब करति है । काऊ को पानी ना आय रहो, काऊ की बिजली नाने तो काऊ की गली में सफाई ना हे रही, अब हम झाड़ू लेके जायें का, सिगुई देस परेसान है, कौन कौन की सुनें सो वा नम्‍बर की सिम खेंच देत हैं ।

बाबूओं ने साहब की समझाइस के अनुसार फिर से बजटिंग का एनकाउण्‍टर करना शुरू किया, फिर भी बजट था कि सरैण्‍डर कर रहा था । हैरान परेसान बाबूओं ने आखिर खेंच के दारू का मद भी चढ़ा दिया, साहब की डेली इत्‍ती, बाबूओं ने इत्‍ती और आने जाने वाले अतिथियों ने इत्‍ती और रोज टाइमपासीयों ने इत्‍ती पी ......। आखिर जब हिसाब लगाया तो अब न केवल बजट एनकाउण्‍टर हो गया बल्कि शॉट डेड हो गया, बल्‍कन ओवर बजट हो गया ।

मार्च क्‍लोजिंग हो गया, अब जब साहब पर्सनल टूर से लौटेंगे तो पीठ ठोकेंगे वाह भई वाह, हूं साला बार बार सरैण्‍डर कर रहा था, कर दिया एनकाउण्‍टर हो गया शॉट डेड । निबट गया गड़रिया की तरह, जादा ही अति धर रखी थी ।

शनिवार, 1 मार्च 2008

हास्‍य / व्‍यंग्‍य तानसेन का सितारा और ताजमहल का गुम्‍बज काहे न भयो आई.एस.आई

हास्‍य / व्‍यंग्‍य

तानसेन का सितारा और ताजमहल का गुम्‍बज काहे न भयो आई.एस.आई

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

आजकल टी.वी. पे मियां तानसेन छाये हुये हैं, जागो ग्राहक जागो कम्‍पनी वाले देश को चेता रहे हैं कि मियां तानसेन का सितारा आई.एस.आई. मार्क वाला न हुआ तो तानसेन घटिया हो गया, उसका संगीत और तान बेसुरी हो गयी वह दो कौड़ी का गवैया तो छोड़ो आदमी भी नहीं रहा ।

लोग कहते हैं तानसेन की तान सुन कर ''धरा मेरू सब डोलते सुन तानसेन की तान'' और दीपक राग जब वे गाते थे तो दीपक अपने आप जल उठते थे ।

जागो ग्राहक जागो ने आज देश की ऑंखे खोल दीं हैं, देश जो युगों से बेवकूफ बनता आ रहा था और तानसेन को महान तीस मारखां गवैया माने बैठा था, जागो ग्राहक जागो वालों ने दूरदर्शन के जरिये देश को सच्‍चा ज्ञान देकर ''तमसो मा ज्‍योतिर्गमय'' यानि अंधेरे से प्रकाश की ओर कर दिया है ।

चलो अच्‍छा हुआ ''जागो ग्राहक जागो'' नामक कम्‍पनी ने तानसेन के सितारे की ब्राण्डिंग चेक कर ली और देश को बता दिया कि ससुरा तानसेन का सितारा तो आई.एस.आई. था ही नहीं, साथ ही जहॉंपनाह को भी आगाह कर दिया और उन्‍हें तानसेन के बेआईएसआई सितारे के खतरे से चेता दिया अब जहॉंपनाह तानसेन का सितारा नहीं सुनते । वरना तानसेन के सितारे से या तो उनके कान फट जाते या करण्‍ट लग जाता या ब्‍लास्‍ट ही हो जाता सो सारी सभा ही उड़ जाती ।

उफ कितना उपकार किया है ''जागो ग्राहक जागो'' नामक कम्‍पनी ने देश के ऊपर ।

अब भईया मैं पी.एम. होता जो गारण्‍टी से ऐसी अमूल्‍य व महत्‍वपूर्ण रिसर्च के लिये कम्‍पनी को या तो भारत रत्‍न दे देता या नोबल पुरूस्‍कार ही रिकमण्‍ड करवा देता । पर अफसोस मेरा नंबर हर बार काट कर कोई न कोई दूसरा ही कुर्सी पर बैठ जाता है ।

ससुरी बेवकूफ है मध्‍यप्रदेश सरकार जो हर साल तानसेन समारोह मना मना कर करोड़ों फूंक देती है, इत्‍ता पैसा अगर तानसेन को दे देती तो बेचारा कम से कम एक अदद आई.एस.आई. मार्के का सितारा तो ले आता ।

ग्‍वालियर वाले सफां सिरफिरे हैं जो तानसेन की जन्‍मस्‍थली बेहट और उनके मकबरे पे शीश नवा नवा के टेढ़े हुये जा रहे हैं । मैं बहुत दिनों से ग्‍वालियर वासीयों की लगातार झुकती जा रही कमर देखकर बेहद परेशान था और उन्‍हें सीधा करने का उपाय भी समझ नहीं आ रहा था । उनकी आधी कमर मंहगाई के बोझ से और चौथाई महानुभावों, अफसरों और नेताओं के आगे झुक झुक कर टेढ़ी हो जाती है, बची खुची ऐतिहासिक व धार्मिक हस्‍तीयों के शीश नमन में  टेढ़ी हो लेती है, सो ग्‍वालियर वाले अक्‍सर किसी से मिलते वक्‍त सीधे दण्‍डवत कर मिलते हैं , यानि हण्‍ड्रेड परसेण्‍ट कमर झुकाकर ।

चलो कम्‍पनी ने बता दिया, आगाह कर दिया । अब ग्‍वालियर वालों को बेहट में जाकर और तानसेन के मकबरे पर मथ्‍था टैकी नहीं करनी पड़ेगी, सो कमर का कुछ परसेण्‍ट तो टेढ़ा होना रूक ही जायेगा

अब ताजमहल और बचा है, उसकी भी ट्रेड मार्किंग और ब्राण्डिंग हो जाये तो चैन आ जाये । ससुरा उस पर भी आई.एस.आई. नहीं है । ऐसे ताजमहल से देश को और पर्यटकों को भारी खतरा है जिस पर आई.एस.आई. का मार्का नहीं है ।

उधर मियां तानसेन ने जब टी.वी. देखा और कॅम्‍पनी के विज्ञापन में अपने सितारे की कलई खुलती देखी तो बेचारे आजकल वकीलों के चक्‍कर लगाते फिर रहे हैं कि कोई उनके सितारे का ट्रेडमार्क करवा कर आई.एस.आई. चिहन दिलवा दे । अब वकीलों की फीस ज्‍यादा है और आई.एस.आई. के बाबू अफसरों की रिश्‍वत डिमाण्‍ड हाई है सो बेचारे मियां तानसेन इस दर से उस दर ठुकियाते फिर रहे हैं ।

मियां मुझसे मिले और बोले ठाकुर साहब हमारी दरखास (एप्‍लीकेशन) इण्‍टरनेट से ऑनलाइन ऊपर पहुँचा दो कि हमें बड़ी दिक्‍कत आ रही है, हम लेना चाहते हैं मगर, आई.एस.आई. नहीं मिल पा रिया है, साले ऊपर बैठे लोग फन्‍देबाजी कर रिये हैं । पैसा पैसा चिल्‍ला रिये हैं, फत्‍तरों (पत्‍थरों) के सैर (शहर) में आ गिया हूं , कोई सुनई नहीं रिया है ।

हम बोले मियां तानसेन जि आनलाइन फोन लाइन का कोई मतलब नहीं है । कोई नहीं सुनता है । कोई कार्रवाई फार्रवाई नहीं होती, सब हाथी के दिखाऊ दांत हैं, हमने शिकायत कर कर के इण्‍टरनेट छक्‍क भर दिया है, पर न कोई के कान पे जूं रेंगी न गाज गिरी । नकली नौटंकी है सब ।

मियां तानसेन घबराये और बोले, तो मैं कहॉं जाऊं, मैंने प्‍यारी सी कीमती सलाह फोकट में तानसेन के कान में चुपके से दी, मियां इलेक्‍शन आ रहे हैं, चुनाव चिहन सितारा बना कर कहीं से फाइट कर लो, जीत गये तो सरकार बन जाओगे और ऐश करोगे और तुम्‍हारा सितारा ब्राण्‍ड एम्‍बेसेडर हो जायेगा और तुम भारत रत्‍न, अगर हार गये तो कम से कम नेता तो बन ही जाओगे और दलाली चालू कर देना, फिर खुद का सितारा तो चल ही जायेगा साथ ही दूसरों के सितारे भी चमकाने लगोगे ।

मियां को मेरी सलाह जंच गई और अब वे इलेक्‍शन फाइट करने के लिये गली गली सितार बजाते डोल रहे हैं, कई सितार खानों के उदघाटन भी कर आये हैं , शादी का भोज हो, भण्‍डारा हो या तेरहवीं वे कोई मौका नहीं गंवा रहे । उनका ख्‍याल है कि अन्‍य बजटों की तरह सितारा बजट भी अलग से सरकार को पेश करना चाहिये । और अपनी बेसुरी वाणी और गैर आई.एस.आई. मार्के सितारे के साथ मोहम्‍मद रफी का गाना ''तुम मुझे यूं भुला न पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत (राग) मेरे, संग संग तुम भी गुनगुनओगे'' गाते हुये आजकल देश में चक्‍कर लगा रहे हैं ।